हालिया अध्ययन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के 102 जिलों में से लगभग 30% जिलों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता कम पाई गई। अध्ययन में अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और सूखा जैसी समस्याओं को उजागर किया गया है, और बेहतर क्षेत्रीय जलवायु अनुकूलन रणनीतियों की आवश्यकता बताई गई है।
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- केंद्रीय भारत के लगभग 30% जिलों में जलवायु प्रतिरोध क्षमता की कमी
- अध्ययन में MP, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और UP के 102 जिले शामिल
- जिले अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और सूखा जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं
- 27.39% जिले ‘कम प्रतिरोध क्षमता’ वाली श्रेणी में
- कम प्रतिरोध क्षमता का कारण: खराब बुनियादी ढांचा, निरक्षरता और सीमित संस्थागत समर्थन
- 43.91% जिले में मध्यम प्रतिरोध क्षमता, 28.71% जिले उच्च प्रतिरोध क्षमता वाले
- प्रमुख कम प्रतिरोध क्षमता वाले जिले: भोपाल, गुना, मोरेना, पन्ना (MP)
- जलवायु प्रभाव: कृषि उत्पादकता में गिरावट, जल संकट और स्वास्थ्य जोखिम
- स्थानीय जलवायु अनुकूलन नीतियों और शिक्षा-आधारित निवेश की आवश्यकता
- अध्ययन में जल संचयन, भूमि उपयोग विविधीकरण और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापना की सिफारिश





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