भारत और दक्षिण अफ्रीका ने प्रौद्योगिकी, औद्योगिक सह-उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा तथा अफ्रीका में रणनीतिक सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में नई पहल की है।
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- भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अपने दीर्घकालिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को अनुसंधान आधारित मॉडल से औद्योगिक सह-उत्पादन आधारित ढांचे में परिवर्तित किया है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, उन्नत विनिर्माण, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स तथा साइबर-भौतिक प्रणालियों को साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र बनाया गया है।
- दोनों देश स्थानीय रोजगार सृजन, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार और समावेशी डिजिटल सेवाओं के विस्तार के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देंगे।
- सहयोग का विस्तार नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, जैव प्रौद्योगिकी, टीका निर्माण तथा किफायती स्वास्थ्य नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी किया जा रहा है।
- स्क्वायर किलोमीटर एरे परियोजना के माध्यम से खगोल विज्ञान, उच्च प्रदर्शन संगणना, विशाल आंकड़ा विश्लेषण और वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता को आगे बढ़ाया जा रहा है।
- तेलंगाना और दक्षिण अफ्रीका के बीच सूचना प्रौद्योगिकी, औषधि निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, रक्षा, अंतरिक्ष, कृषि प्रसंस्करण तथा निवेश सहयोग पर विशेष ढांचा विकसित किया गया है।
- अफ्रीका के प्रति भारत की आर्थिक रणनीति अब औद्योगिक साझेदारी, महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता, क्षेत्रीय व्यापार समझौतों और विनिर्माण केंद्रों पर अधिक केंद्रित है।
- भारत और अफ्रीका के बीच गहरा सहयोग वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को मजबूत करने, व्यापार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और रणनीतिक प्रभाव विस्तार में सहायक बन रहा है।





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