विश्व असमानता प्रयोगशाला और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की क्लाइमेट इनइक्वैलिटी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, दुनिया के सबसे अमीर 1% लोग निजी पूंजी से जुड़े 41% उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि जलवायु वित्त को अधिक न्यायसंगत नहीं बनाया गया, तो वैश्विक असमानता और बढ़ेगी तथा गरीबों को जलवायु क्षति का सबसे अधिक नुकसान होगा।
BulletsIn
- विश्व असमानता प्रयोगशाला और UNEP की रिपोर्ट में उत्सर्जन को संपत्ति से जोड़ा गया।
- सबसे अमीर 1% द्वारा 41% उत्सर्जन, प्रति व्यक्ति गरीब आधे से 680 गुना अधिक।
- अर्थशास्त्री लुकास शांसल ने कहा — अमीर अधिक उपभोग करते हैं और प्रदूषणकारी संपत्तियों में निवेश करते हैं।
- गरीब 50% सबसे कम योगदान देते हैं लेकिन जलवायु प्रभावों से सबसे अधिक पीड़ित होते हैं।
- 2050 तक, गरीब आधे की आय में 74% की गिरावट, जबकि अमीर 10% को केवल 3% हानि।
- हरित परिवर्तन (Green Transition) यदि अमीरों के नियंत्रण में रहा तो असमानता बढ़ेगी।
- जूदा रुझान जारी रहे तो संपत्ति का संकेन्द्रण 38% से 46% तक बढ़ सकता है।
- कार्बन संपत्तियों पर कर और सार्वजनिक निवेश से यह घटकर 26% तक आ सकता है।
- विकासशील देशों को कम उत्सर्जन के बावजूद ग्रीन लोन पर अधिक ब्याज देना पड़ता है।
- रिपोर्ट ने वैश्विक ऋण सुधार, सार्वजनिक स्वामित्व, और जीवाश्म ईंधन निवेश रोकने की मांग की।





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.