पंचायतें Constitution of India के अंतर्गत स्थानीय स्वशासन की आधारभूत इकाइयाँ हैं, जिनकी शक्तियाँ, जिम्मेदारियाँ और वित्तीय अधिकार मुख्यतः राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
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- राज्य विधानमंडल पंचायतों की शक्तियों, कार्यों और वित्तीय अधिकारों को निर्धारित करता है, जिससे वे स्थानीय स्वशासन और ग्रामीण विकास की प्रभावी संस्थाओं के रूप में कार्य कर सकें।
- Eleventh Schedule में 29 विषय शामिल हैं, जैसे कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना, जिन्हें पंचायतों को स्थानीय प्रशासन और योजना निर्माण के लिए सौंपा जा सकता है।
- पंचायतों का दायित्व आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन करना है, जिससे समावेशी विकास और जनकल्याण सुनिश्चित हो सके।
- वित्तीय शक्तियों में कर, शुल्क और उपकर लगाने व संग्रह करने का अधिकार, राज्य से राजस्व प्राप्त करना तथा समेकित कोष से अनुदान प्राप्त करना शामिल है।
- 73rd Constitutional Amendment Act के तहत ग्राम सभा का गठन, नियमित चुनाव, महिलाओं तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण और पांच वर्ष का निश्चित कार्यकाल अनिवार्य किया गया है।
- पंचायत चुनावों का संचालन State Election Commission करता है, जबकि State Finance Commission प्रत्येक पांच वर्ष में उनकी वित्तीय स्थिति और संसाधनों के वितरण की समीक्षा करता है।
- वैकल्पिक प्रावधान राज्यों को पंचायतों को अधिक स्वायत्तता, वित्तीय अधिकार तथा सांसदों और विधायकों का प्रतिनिधित्व देने की अनुमति देते हैं।
- अनुच्छेद 243 के अंतर्गत लेखा-परीक्षा, केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होने, कुछ राज्यों को छूट तथा जनजातीय क्षेत्रों में विस्तार के लिए PESA Act, 1996 जैसे प्रावधान शामिल हैं।





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