भारत 2025 में वैश्विक स्तर पर पांचवां सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश बन गया है, जो सैन्य आधुनिकीकरण, सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता बढ़ाने पर बढ़ते निवेश को दर्शाता है।
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- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार 2025 में भारत 92.1 अरब डॉलर रक्षा खर्च के साथ दुनिया में पांचवें स्थान पर रहा, जो वैश्विक खर्च का 3.2% है।
- भारत का रक्षा व्यय 2024 की तुलना में 8.9% बढ़ा, जो क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच सैन्य आधुनिकीकरण और ऑपरेशनल तैयारी पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है।
- अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी भारत से आगे रहे, जहां शीर्ष तीन देशों का वैश्विक रक्षा खर्च में सबसे बड़ा योगदान रहा।
- पाकिस्तान का रक्षा खर्च 11% बढ़कर 11.9 अरब डॉलर हुआ और वह 31वें स्थान पर रहा, लेकिन यह भारत के मुकाबले काफी कम है।
- भारत ने अपने रक्षा बजट में लड़ाकू विमान, मिसाइल, ड्रोन, नौसेना प्रणाली और आधुनिक हथियारों पर निवेश बढ़ाया है, जिससे सैन्य क्षमता मजबूत हुई है।
- 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च 2.887 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिसमें यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सबसे अधिक वृद्धि दर्ज हुई।
- भारत अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक है, लेकिन उसने रूस पर निर्भरता कम करते हुए फ्रांस, इज़राइल और अमेरिका से खरीद बढ़ाई है।
- बजट 2026–27 में सरकार ने रक्षा के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए, जिससे स्वदेशी उत्पादन और आधुनिक सैन्य तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।





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