दिल्ली सल्तनत काल में कृषि, राजस्व व्यवस्था, व्यापार, मुद्रा प्रणाली, सामाजिक संरचना और धार्मिक संस्थाओं का महत्वपूर्ण विकास हुआ, जिसने मध्यकालीन भारत को गहराई से प्रभावित किया।
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- अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित थी तथा भूमि राजस्व राज्य की आय का प्रमुख स्रोत था।
- इकता प्रणाली राजस्व संग्रह और प्रशासन का महत्वपूर्ण आधार थी।
- खालिसा भूमि सीधे सुल्तान के नियंत्रण में होती थी।
- खराज कृषि भूमि पर लगाया जाने वाला प्रमुख कर था।
- अलाउद्दीन खिलजी ने भूमि मापन और प्रत्यक्ष कर संग्रह की व्यवस्था लागू की।
- मुहम्मद बिन तुगलक ने सोंधर नामक कृषि ऋण योजना शुरू की।
- इल्तुतमिश ने टंका और जीतल सिक्कों के माध्यम से मुद्रा व्यवस्था को व्यवस्थित किया।
- मुहम्मद बिन तुगलक की सांकेतिक मुद्रा योजना जालसाजी के कारण असफल रही।
- स्थलीय और समुद्री दोनों प्रकार के व्यापार का विस्तार हुआ।
- घोड़े, सोना और चाँदी प्रमुख आयात थे, जबकि वस्त्र और अनाज प्रमुख निर्यात थे।
- जाति व्यवस्था सामाजिक संरचना का प्रमुख आधार बनी रही।
- महिलाओं की स्थिति सामान्यतः अधीनस्थ थी तथा पर्दा, सती और जौहर जैसी प्रथाएँ प्रचलित थीं।
- दास प्रथा समाज और प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा थी।
- उलेमा धार्मिक और कानूनी मामलों में प्रभावशाली भूमिका निभाते थे।
- इस काल में भारतीय और इस्लामी परंपराओं का सांस्कृतिक समन्वय देखने को मिला।





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