एक नए अध्ययन में बताया गया है कि नमी वाली गर्मी भारत की सबसे खतरनाक जलवायु समस्या बन रही है, जिसमें केरल को सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र माना गया है।
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* अध्ययन में कहा गया है कि नमी वाली गर्मी सूखी गर्मी से अधिक खतरनाक है क्योंकि अधिक नमी पसीने के वाष्पीकरण को रोकती है और शरीर को ठंडा नहीं होने देती।
* मानसून आधारित मौसम पैटर्न नमी वाली गर्मी की घटनाओं को प्रभावित करते हैं, जिससे भारत में मौसम आधारित जोखिम बढ़ रहा है।
* केरल को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना गया है क्योंकि वहां अधिक नमी, समुद्री स्थिति और तेज मानसून प्रभाव गर्मी को और खतरनाक बनाते हैं।
* शोध में पाया गया कि सामान्य तापमान सीमा से कम होने पर भी नमी वाली गर्मी से हीटस्ट्रोक जैसे स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकते हैं।
* तटीय और निचले क्षेत्र अधिक प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि बढ़ते तापमान और नमी मिलकर बाहरी काम के सुरक्षित समय को कम कर रहे हैं।
* भारत की मौजूदा चेतावनी प्रणाली मुख्य रूप से तापमान पर आधारित है, जबकि नमी और वेट-बल्ब जैसे संकेतक कम उपयोग किए जाते हैं।
* मानसून आधारित नमी पूर्वानुमान को बेहतर करने से समय से पहले चेतावनी दी जा सकती है और तैयारी बेहतर हो सकती है।
* विशेषज्ञों का सुझाव है कि हीट एक्शन प्लान, कूलिंग सेंटर और काम के समय में बदलाव जैसे उपाय जरूरी हैं।





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