भारत में सरकारी बजट प्रक्रिया एक संवैधानिक व्यवस्था है जो कराधान, व्यय, वित्तीय नियोजन तथा सार्वजनिक धन के उपयोग पर संसदीय नियंत्रण सुनिश्चित करती है।
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- केंद्रीय बजट सरकार का वार्षिक वित्तीय विवरण होता है जिसमें एक वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित आय और व्यय का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाता है।
- संविधान में “बजट” शब्द का उल्लेख नहीं है। अनुच्छेद 112 के अनुसार इसे वार्षिक वित्तीय विवरण कहा जाता है जिसे प्रत्येक वर्ष संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
- अनुच्छेद 265 के अनुसार विधिक प्राधिकरण के बिना कोई कर नहीं लगाया जा सकता, जबकि अनुच्छेद 266 के अनुसार व्यय हेतु विधायिका की स्वीकृति आवश्यक होती है।
- वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देता है तथा बजट के साथ अतिरिक्त वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत करने का प्रावधान करता है।
- प्रमुख बजट दस्तावेजों में वार्षिक वित्तीय विवरण, अनुदानों की मांग, विनियोग विधेयक, वित्त विधेयक, प्राप्ति बजट तथा व्यय बजट शामिल होते हैं।
- वर्ष 2017 से रेल बजट को सामान्य बजट में सम्मिलित कर दिया गया, जिससे पृथक रेल बजट प्रस्तुत करने की दीर्घकालीन परंपरा समाप्त हो गई।
- सामान्यतः केंद्रीय बजट प्रत्येक वर्ष 1 फरवरी को प्रस्तुत किया जाता है, जबकि आर्थिक सर्वेक्षण बजट से एक दिन पूर्व संसद में रखा जाता है।
- लेखानुदान सरकार को पूर्ण बजट पारित होने तक आवश्यक सरकारी व्यय के लिए सीमित अवधि हेतु धन उपयोग की अनुमति प्रदान करता है।
- वित्त मंत्री का बजट भाषण आर्थिक स्थिति की समीक्षा, कर प्रस्तावों तथा आगामी वर्ष की विकासात्मक और वित्तीय प्राथमिकताओं को प्रस्तुत करता है।
- बजट प्रक्रिया वित्तीय पारदर्शिता, संसदीय उत्तरदायित्व तथा सार्वजनिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करते हुए आर्थिक विकास को समर्थन प्रदान करती है।





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