अल्लूरी सीताराम राजू ने 1920 के दशक में पूर्वी घाट क्षेत्र में ब्रिटिश शासन के खिलाफ आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किया, औपनिवेशिक नीतियों का विरोध किया।
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- अल्लूरी सीताराम राजू का जन्म 1897 में वर्तमान आंध्र प्रदेश में हुआ और वे ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन के खिलाफ क्रांतिकारी नेता के रूप में उभरे।
- उन्होंने 1922 से 1924 तक रम्पा विद्रोह का नेतृत्व किया, जो आदिवासी समुदायों द्वारा वन कानूनों और शोषण के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन था।
- इस आंदोलन का विरोध मद्रास वन अधिनियम के खिलाफ था, जिसने पारंपरिक झूम खेती और वन संसाधनों तक पहुंच को सीमित कर दिया था।
- राजू ने गुरिल्ला युद्ध रणनीति अपनाई, जिसमें पुलिस थानों और ब्रिटिश संस्थानों पर सुनियोजित हमले शामिल थे।
- उन्होंने बिखरे हुए आदिवासी समूहों को संगठित कर औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक संगठित सशस्त्र आंदोलन बनाया।
- ब्रिटिश प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर घने जंगल क्षेत्रों में उन्हें पकड़ने के प्रयास किए और अंततः गिरफ्तार किया।
- 1924 में उन्हें मृत्युदंड दिया गया, जिससे विद्रोह समाप्त हुआ लेकिन आंदोलन का प्रभाव बना रहा।
- उनकी विरासत आदिवासी प्रतिरोध का प्रतीक है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।





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