भारत में केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध संविधान के अनुसार कर, राजस्व और वित्तीय जिम्मेदारियों का वितरण निर्धारित करते हैं ताकि संघीय संतुलन और आर्थिक स्थिरता बनी रहे।
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- भारतीय संविधान के भाग XII (अनुच्छेद 268–293) में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों का विस्तृत ढांचा निर्धारित किया गया है।
- कराधान शक्तियां संघ सूची और राज्य सूची में विभाजित हैं, जबकि अवशिष्ट कराधान अधिकार संसद को दिए गए हैं।
- वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने कर प्रणाली को संयुक्त रूप दिया है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों मिलकर अप्रत्यक्ष कर वसूलते हैं।
- वित्त आयोग केंद्र करों के विभाज्य पूल से राज्यों को हिस्सा देने की सिफारिश करता है ताकि संतुलित विकास हो सके।
- अनुच्छेद 275 के तहत कमजोर राज्यों को विकास और वित्तीय सहायता के लिए अनुदान प्रदान किया जाता है।
- अनुच्छेद 282 के तहत केंद्र और राज्य दोनों जनकल्याण योजनाओं के लिए विवेकाधीन अनुदान दे सकते हैं।
- राज्यों को घरेलू उधारी की अनुमति होती है लेकिन कुछ स्थितियों में केंद्र की मंजूरी आवश्यक होती है।
- आपातकालीन प्रावधानों के तहत केंद्र अस्थायी रूप से वित्तीय व्यवस्था में बदलाव कर सकता है ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे।





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