1875 के दक्कन दंगे पश्चिमी भारत में किसानों का एक महत्वपूर्ण विद्रोह था, जो कर्ज, साहूकारों के शोषण और कठोर भूमि कर व्यवस्था के कारण उत्पन्न हुआ।
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- यह विद्रोह मुख्य रूप से पूना और अहमदनगर क्षेत्रों में हुआ, जहां किसानों ने बढ़ते कर्ज, साहूकारों के अत्याचार और आर्थिक संकट के खिलाफ सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन किया।
- रैयतवाड़ी व्यवस्था के अंतर्गत किसानों पर उच्च और निश्चित भूमि कर लगाया गया, जिसे उन्हें फसल की स्थिति या प्राकृतिक परिस्थितियों की परवाह किए बिना चुकाना पड़ता था।
- अमेरिकी गृह युद्ध के कारण पहले कपास की मांग बढ़ी, लेकिन बाद में कीमतों में गिरावट आई, जिससे किसानों की आय घटी और कर्ज चुकाने की क्षमता कमजोर हो गई।
- साहूकारों द्वारा अत्यधिक ब्याज दरें वसूली जाती थीं और कानूनी व्यवस्था उनके पक्ष में होने के कारण किसान कर्ज के जाल में फंसते गए और उनकी जमीन छिनने लगी।
- यह आंदोलन सुपा गांव से शुरू हुआ और तेजी से अन्य क्षेत्रों में फैल गया, जिसमें किसानों ने कर्ज के दस्तावेज नष्ट किए और साहूकारों की संपत्ति को निशाना बनाया।
- यह विद्रोह बिना किसी केंद्रीय नेतृत्व के था, फिर भी इसमें विभिन्न सामाजिक वर्गों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली और महिलाओं ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
- शासन ने प्रारंभ में इसे कम आंका, लेकिन बाद में सेना और पुलिस के माध्यम से इसे दबा दिया और कई लोगों को गिरफ्तार कर स्थिति को नियंत्रित किया।
- इसके परिणामस्वरूप किसानों को राहत देने के लिए महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए, जिनका उद्देश्य साहूकारों के प्रभाव को नियंत्रित करना और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।





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