अमेरिका ने प्रायोगिक एरेंडिल-1 अंतरिक्ष दर्पण उपग्रह को मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसके बाद रात्रि आकाश, प्रकाश प्रदूषण, पर्यावरण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के भविष्य को लेकर विश्वभर में चर्चा तेज हो गई है।
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- अमेरिका ने एरेंडिल-1 नामक प्रायोगिक उपग्रह के प्रक्षेपण को मंजूरी दी है, जिसमें पृथ्वी की ओर सूर्य का प्रकाश परावर्तित करने वाला विशाल दर्पण लगाया जाएगा।
- यह उपग्रह कैलिफोर्निया स्थित रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल द्वारा विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य रात्रि के समय चयनित क्षेत्रों में अस्थायी प्रकाश उपलब्ध कराने की तकनीक का परीक्षण करना है।
- उपग्रह में लगभग 18 मीटर का परावर्तक दर्पण लगाया जाएगा, जो सीमित अवधि तक सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी के निर्धारित स्थानों की ओर भेज सकेगा।
- कंपनी का लक्ष्य 2035 तक लगभग 50000 ऐसे उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित करना है, जिनका उपयोग कृषि, आपदा सहायता, निर्माण कार्य तथा अन्य आवश्यक सेवाओं में किया जा सके।
- खगोल वैज्ञानिकों का मानना है कि कृत्रिम प्रकाश रात्रि आकाश की प्राकृतिक स्थिति को प्रभावित करेगा और दूरबीनों द्वारा अंतरिक्ष अध्ययन में गंभीर बाधा उत्पन्न कर सकता है।
- पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कृत्रिम प्रकाश वन्यजीवों, प्रवासी जीवों, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र तथा जैविक चक्रों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
- वर्तमान स्वीकृति केवल एक प्रायोगिक उपग्रह तक सीमित है, जबकि भविष्य में बड़े उपग्रह समूह के लिए अतिरिक्त तकनीकी परीक्षण और नियामकीय स्वीकृतियां आवश्यक होंगी।
- इस निर्णय के बाद वैज्ञानिक प्रगति, पर्यावरण संरक्षण और अंतरिक्ष संसाधनों के उत्तरदायी उपयोग के बीच संतुलन बनाने पर वैश्विक चर्चा और तेज हो गई है.





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