उत्तर प्रदेश की बखीरा झील के अवसादों ने 25000 वर्षों के भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून बदलावों का प्रमाण दिया, जिससे जलवायु समझ बेहतर होगी।
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- शोधकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश की बखीरा झील के अवसादों में सुरक्षित पर्यावरणीय चुंबकीय गुणों से 25000 वर्षों के भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून का पुनर्निर्माण किया।
- अध्ययन बिरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत किया है।
- बखीरा झील घाघरा राप्ती जलोढ़ तंत्र का महत्वपूर्ण स्थायी आर्द्रभूमि क्षेत्र है और 2022 में रामसर स्थल घोषित हुई।
- सात त्वरक द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमिति रेडियोकार्बन तिथियों ने उत्तर चतुर्थक काल के प्रमुख जलवायु चरणों का व्यवस्थित अभिलेख तैयार किया।
- अंतिम हिमानी अधिकतम के दौरान कमजोर मानसून स्थितियां दर्ज हुईं, जबकि अपेक्षाकृत गर्म बोलिंग एलरॉड काल में वर्षा और मानसूनी गतिविधि मजबूत रही।
- यंगर ड्रायस काल में फिर ठंड और शुष्कता बढ़ी तथा मानसून कमजोर हुआ, जबकि होलोसीन जलवायु अधिकतम में गर्म और नम परिस्थितियां रहीं।
- शोधकर्ताओं ने चुंबकीय मापों के साथ कण आकार, रासायनिक संरचना और चिकनी मिट्टी संबंधी प्रमाणों का उपयोग करके जलविज्ञान और अपरदन में बदलाव समझे।
- अध्ययन से प्राप्त दीर्घकालीन जलवायु आधाररेखा जलवायु प्रतिरूपों, जल संसाधन योजना, कृषि, बाढ़ नियंत्रण और आर्द्रभूमि संरक्षण में सहायता कर सकती है।
- शोध प्राकृतिक दीर्घकालीन मानसूनी बदलावों को मानव गतिविधियों से जुड़े हालिया जलवायु परिवर्तनों से अलग समझने में वैज्ञानिक सहायता प्रदान करता है।
- शोध पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन मध्य गंगा मैदान में मानसून की दीर्घकालीन प्रतिक्रियाओं और जलवायु बदलावों की समझ मजबूत करता है।
- दीर्घकालीन मानसूनी प्रमाण उत्तर भारत में बदलते वर्षा स्वरूपों के कारण नदियों, झीलों और आर्द्रभूमियों पर पड़ने वाले प्रभाव समझने में सहायक होंगे।
- शोध बाढ़, सूखा और बदलते मानसून से जुड़े जोखिम घटाने तथा जल संसाधनों के बेहतर संरक्षण और प्रबंधन के लिए उपयोगी आधार प्रदान करता है।





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