दुनिया के संरक्षित धरोहर स्थलों पर बढ़ता पर्यावरणीय दबाव गंभीर चिंता का विषय बन गया है, जहां जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियां प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर रही हैं।
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- संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन की नई रिपोर्ट के अनुसार लगभग नब्बे प्रतिशत संरक्षित धरोहर स्थल गंभीर पर्यावरणीय दबाव का सामना कर रहे हैं।
- जलवायु परिवर्तन का प्रभाव लगभग सभी स्थलों पर देखा गया है, जिसमें अत्यधिक तापमान, हिमनदों का पिघलना, महासागरों की अम्लीयता और प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि शामिल है।
- वन क्षेत्रों में परिवर्तन का प्रमुख कारण अब जंगल की आग बन चुकी है, जो अन्य गतिविधियों की तुलना में अधिक प्रभाव डाल रही है।
- वर्ष दो हजार के बाद से विशाल क्षेत्र में वृक्ष आच्छादन में कमी आई है और अनेक स्थलों पर बाहरी प्रजातियों का प्रभाव बढ़ गया है।
- रिपोर्ट के अनुसार कई स्थल वर्ष दो हजार पचास तक गंभीर स्थिति तक पहुंच सकते हैं, जिससे पारिस्थितिक तंत्र को स्थायी क्षति होने की आशंका है।
- हिमनदों में तेजी से कमी और समुद्री जल की बढ़ती अम्लीयता से प्रवाल भित्तियों और समुद्री जीवों पर खतरा बढ़ रहा है।
- इसके बावजूद ये स्थल जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र बने हुए हैं और अनेक प्रजातियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
- ये क्षेत्र आजीविका, जलवायु संतुलन और आर्थिक गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं तथा सतत विकास को समर्थन प्रदान करते हैं।





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