जापान की तोहो यूनिवर्सिटी और NASA द्वारा संचालित एक अध्ययन में पाया गया है कि धरती पर जीवन का अंत उल्कापिंड या जलवायु परिवर्तन से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे ऑक्सीजन की कमी से होगा। यह प्रक्रिया अरबों वर्षों में होगी, जब सूर्य की चमक में वृद्धि के कारण वातावरण में गैसों का संतुलन बिगड़ जाएगा। BulletsIn













