5 अप्रैल 2025 को स्टैंड-अप इंडिया योजना ने अपनी 7वीं वर्षगांठ पूरी की। यह योजना 2016 में आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को नए उद्यम शुरू करने के लिए बैंक ऋण उपलब्ध कराना था। अब तक यह योजना ₹61,000 करोड़ से अधिक ऋण देकर वित्तीय समावेशन का मजबूत मंच बन चुकी है।
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- योजना की शुरुआत 5 अप्रैल 2016 को हुई, उद्देश्य—SC/ST/महिलाओं को ऋण सहायता।
- मार्च 2025 तक ₹61,020 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृत।
- महिला उद्यमियों को सबसे ज्यादा लाभ; खाते 55,644 से बढ़कर 1,90,844 हुए।
- महिलाओं को दिए गए ऋण ₹12,452 करोड़ से बढ़कर ₹43,984 करोड़ हुए।
- SC खातों की संख्या 9,399 से बढ़कर 46,248 हुई; राशि ₹9,747 करोड़ तक पहुँची।
- ST खातों की संख्या 2,841 से बढ़कर 15,228 हुई; ऋण राशि ₹3,244 करोड़।
- योजना ने रोजगार सृजन और समावेशी विकास में बड़ा योगदान दिया।
- सिर्फ वित्तीय सहायता नहीं, अब एक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में बढ़ी।
- पहली बार उद्यम शुरू करने वालों को केंद्र में रखकर तैयार की गई नीति।
- भारत में वित्तीय समावेशन और जमीनी स्तर के उद्यम का उदाहरण बन चुकी है।





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