अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ग्रीनलैंड में तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों और उनके अटलांटिक महासागर की धाराओं, समुद्र-स्तर तथा यूरोप की जलवायु पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक विशेष अभियान पर रवाना हुई है। इस अध्ययन से भविष्य के जलवायु मॉडल और चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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- लगभग 80 वैज्ञानिकों और क्रू सदस्यों की अंतरराष्ट्रीय टीम ग्रीनलैंड के लिए रवाना हुई है।
- यह अभियान RSS David Attenborough ध्रुवीय अनुसंधान पोत पर संचालित किया जाएगा।
- यह मिशन लगभग 5 से 6 सप्ताह तक चलेगा।
- वैज्ञानिक ग्रीनलैंड के तेजी से पिघलते ग्लेशियरों का अध्ययन करेंगे।
- अध्ययन का उद्देश्य अटलांटिक महासागर की धाराओं पर ग्लेशियर पिघलने के प्रभाव को समझना है।
- ग्लेशियरों से निकलने वाला मीठा पानी महासागरीय धाराओं को प्रभावित कर सकता है।
- इससे यूरोप में चरम मौसम, समुद्र-स्तर वृद्धि और जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ सकता है।
- यह अभियान GIANT (Greenland Ice Sheet to Atlantic Tipping Points) परियोजना का हिस्सा है।
- परियोजना का उद्देश्य ग्लेशियरों के व्यवहार और जलवायु परिवर्तन के महत्वपूर्ण बिंदुओं का अध्ययन करना है।
- वैज्ञानिक यह जानेंगे कि ग्लेशियर किस प्रकार टूटकर समुद्र में मिलते हैं।
- अभियान में Boaty McBoatface नामक स्वायत्त पानी के भीतर चलने वाले यान का उपयोग किया जाएगा।
- यह यान 1,500 मीटर तक समुद्र की गहराई में जाकर ग्लेशियरों की संरचना का मानचित्र तैयार करेगा।
- अभियान से प्राप्त आँकड़े नई पीढ़ी के जलवायु मॉडलों को बेहतर बनाने में उपयोग किए जाएंगे।
- इन आँकड़ों से ग्लेशियर ढहने की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने में भी सहायता मिलेगी।
- यह अभियान वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





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