नॉर्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (NESAC) पूर्वोत्तर भारत में लगभग 130 अंतरिक्ष आधारित परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य अंतरिक्ष तकनीक के माध्यम से सुशासन, कृषि, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और रणनीतिक सीमा मानचित्रण को मजबूत करना है।
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- नॉर्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (NESAC) पूर्वोत्तर भारत में लगभग 130 अंतरिक्ष आधारित परियोजनाएँ संचालित कर रहा है।
- इन परियोजनाओं का उद्देश्य अंतरिक्ष तकनीक के माध्यम से सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
- करीब 50 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, जबकि 78 परियोजनाएँ वर्तमान में जारी हैं।
- परियोजनाएँ कृषि, वानिकी, जल संसाधन और भू-विज्ञान जैसे क्षेत्रों को कवर करती हैं।
- NESAC शहरी नियोजन, जियोइन्फॉर्मेटिक्स और सैटेलाइट संचार पर भी कार्य कर रहा है।
- केंद्र ड्रोन (UAV) तकनीक और अंतरिक्ष एवं वायुमंडलीय विज्ञान से जुड़ी परियोजनाएँ भी चला रहा है।
- आपदा प्रबंधन और बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
- NESAC भारत–म्यांमार सीमा और पूर्वोत्तर के अंतर्राज्यीय सीमाओं का जियोस्पेशियल मैपिंग कर रहा है।
- यह केंद्र राज्य सरकारों को योजना निर्माण, सुशासन और सार्वजनिक सेवाओं में तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।
- बाँस संसाधन मानचित्रण कार्यक्रम के माध्यम से बाँस आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
- वैज्ञानिक मानचित्रण से संसाधन प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- NESAC को बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली की सटीकता और बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
- GeoTourism ‘ManzilNE’ Dashboard के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत के पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- केंद्र को सरकारी विभागों, शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने की सलाह दी गई है।
- अंतरिक्ष तकनीक पूर्वोत्तर भारत में सतत विकास, आपदा लचीलापन और रणनीतिक योजना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।





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