India Meteorological Department (IMD) के अध्ययन के अनुसार भारत के तटीय क्षेत्रों में बढ़ती उमस भरी गर्मी से स्वास्थ्य, श्रम उत्पादकता और जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
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- भारत के तटीय क्षेत्रों में, विशेषकर मानसून से पहले, उमस भरी गर्मी तेजी से बढ़ रही है।
- वेट-बलब तापमान (WBT) में वृद्धि से गर्मी और नमी का संयुक्त प्रभाव अधिक खतरनाक हो गया है।
- 1981–2020 के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन में सभी मौसमों में हीट स्ट्रेस बढ़ता दिखा है।
- 2000 के बाद से हीट स्ट्रेस की घटनाएँ अधिक बार और अधिक तीव्र हो गई हैं।
- पूर्वी तट पर नमी की वृद्धि पश्चिमी तट की तुलना में अधिक तेज़ी से हो रही है।
- Indian Ocean के गर्म होने से वातावरण में नमी बढ़ रही है।
- अधिक नमी के कारण शरीर पसीने के माध्यम से ठंडा नहीं हो पाता, जिससे हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
- मछुआरे और अन्य श्रमिक अब अत्यधिक गर्मी के कारण कम समय तक काम कर पा रहे हैं।
- हीट स्ट्रेस का प्रभाव स्वास्थ्य, उत्पादकता और शहरी जीवन पर गंभीर पड़ रहा है।
- बुजुर्ग, बाहरी काम करने वाले लोग और कमजोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
- 2022 में भारत में लगभग 191 अरब श्रम घंटे गर्मी के कारण खो गए।
- विशेषज्ञों ने हीट एक्शन प्लान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और जलवायु अनुकूल शहरी योजना की आवश्यकता बताई।
- बेहतर पूर्वानुमान और सुरक्षा के लिए WBT आधारित क्षेत्रीय हीट इंडेक्स विकसित करने की जरूरत है।





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