भारत ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 2014 के 3 गीगावाट से बढ़कर जून 2026 तक 162.15 गीगावाट स्थापित क्षमता प्राप्त कर ली है। नई सरकारी योजनाओं, घरेलू विनिर्माण और तैरती सौर परियोजनाओं के माध्यम से देश स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत कर रहा है।
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- भारत की सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता 2014 में लगभग 3 गीगावाट से बढ़कर 30 जून 2026 तक 162.15 गीगावाट हो गई है, जिससे सौर ऊर्जा देश की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत बन गई है।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है, जिसके अंतर्गत ₹5070 करोड़ की लागत से 5000 मेगावाट तैरती सौर क्षमता तथा 10000 मेगावाट घंटा ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की जाएगी।
- राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के अनुसार भारत में लगभग 102.18 गीगावाट तैरती सौर क्षमता की संभावना है और यह योजना प्रतिवर्ष लगभग 10 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायक होगी।
- वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने रिकॉर्ड 44.61 गीगावाट नई सौर क्षमता जोड़ी, जबकि कुल गैर जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई।
- देश की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 2014 के 2.3 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 तक लगभग 172 गीगावाट हो गई है, जिसे प्रोत्साहन आधारित योजनाओं से गति मिली है।
- प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 43 लाख से अधिक परिवारों ने छत पर सौर प्रणाली स्थापित की है तथा दिसंबर 2025 तक ₹14771.82 करोड़ की केंद्रीय सहायता वितरित की जा चुकी है।
- प्रधानमंत्री कुसुम योजना के माध्यम से 21.77 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधाओं का लाभ मिला है, जिससे कृषि क्षेत्र में ऊर्जा लागत कम हुई है।
- देशभर में 54 सौर पार्कों, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन तथा एक सूर्य एक विश्व एक ग्रिड जैसी पहलों के माध्यम से भारत स्वच्छ ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व को निरंतर मजबूत कर रहा है।





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