आरईसी और पीएफसी के विलय से ऊर्जा क्षेत्र के वित्तपोषण को मजबूती मिलेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और आधारभूत संरचना निवेश को गति मिलेगी।
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- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आरईसी लिमिटेड और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन के विलय को स्वीकृति दी, जिससे ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक सशक्त वित्तीय संस्था बनेगी।
- यह विलय वर्ष 2019 में पीएफसी द्वारा भारत सरकार की 52.63% हिस्सेदारी ₹14,500 करोड़ में अधिग्रहित किए जाने के बाद की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
- विलय पूर्ण होने पर आरईसी की सभी परिसंपत्तियां, देनदारियां, अधिकार और दायित्व पीएफसी को हस्तांतरित हो जाएंगे तथा आरईसी अलग संस्था के रूप में समाप्त हो जाएगी।
- इस एकीकरण से कार्यकुशलता बढ़ने, दोहराव कम होने और विद्युत तथा आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए वित्तीय क्षमता मजबूत होने की संभावना है।
- यह निर्णय सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने की व्यापक सरकारी रणनीति के अनुरूप माना जा रहा है।
- संयुक्त संस्था नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युत पारेषण, वितरण नेटवर्क और अन्य महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अधिक वित्त उपलब्ध करा सकेगी।
- पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन की स्थापना 16 जुलाई 1986 को हुई थी और यह विद्युत मंत्रालय के अधीन महारत्न सार्वजनिक उपक्रम के रूप में कार्य करती है।
- इस विलय से ऊर्जा परिवर्तन, आधारभूत संरचना विस्तार और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।





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