भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि भारतीय रुपया अभी भी कम मूल्यांकित है। हालिया नीतिगत उपायों के बाद एफसीएनआर(बी) जमा लगभग 32 अरब डॉलर तक पहुंच गई है तथा सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
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- भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय रुपया अभी भी कम मूल्यांकित है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियादी स्थिति को दर्शाता है।
- जून 2026 में घोषित नीतिगत उपायों के बाद बैंकों ने मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा के माध्यम से लगभग 32 अरब डॉलर की राशि जुटाई है।
- इसी अवधि में सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश 7 अरब डॉलर से अधिक रहा, जिससे भारत के बाह्य क्षेत्र की मजबूती और पूंजी प्रवाह में वृद्धि हुई है।
- गवर्नर ने यह आशंका खारिज की कि यह निवेश केवल पहले से मौजूद विदेशी जमाओं का पुनः निवेश है और कहा कि यह भारत की आर्थिक संभावनाओं में निवेशकों के वास्तविक विश्वास को दर्शाता है।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त विदेशी पूंजी प्रवाह से उत्पन्न संभावित तरलता का प्रभावी प्रबंधन करने के लिए उसके पास पर्याप्त मौद्रिक और तरलता प्रबंधन साधन उपलब्ध हैं।
- गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दोहराया कि मुद्रास्फीति पर नियंत्रण भारतीय रिजर्व बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, साथ ही वित्तीय स्थिरता बनाए रखना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।
- बढ़ती एफसीएनआर(बी) जमा और सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश ने वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं तथा अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की बाह्य आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि इन पूंजी प्रवाहों से विदेशी मुद्रा भंडार, भुगतान संतुलन तथा भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्विक निवेशकों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।





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