भारत ने वैश्विक दवा कंपनियों को देश में निवेश बढ़ाने का आमंत्रण दिया है और कहा है कि आने वाले वर्षों में भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग का आकार दोगुना हो सकता है।
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- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक फार्मा कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
- उन्होंने नई दिल्ली में फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को संबोधित किया।
- भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वर्तमान में लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर का है।
- अगले पांच वर्षों में इसके दोगुना होने की संभावना जताई गई है।
- भारत केवल जेनेरिक दवाओं तक सीमित न रहकर नवाचार आधारित उत्पादों पर भी ध्यान दे रहा है।
- देश खुद को वैश्विक स्वास्थ्य और दवा आपूर्ति श्रृंखला का विश्वसनीय भागीदार मानता है।
- क्लिनिकल ट्रायल, अनुसंधान, तकनीक और विनिर्माण में नए अवसर मौजूद हैं।
- भारत वैश्विक दवा आपूर्ति नेटवर्क में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
- वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
- बढ़ती आय और विशाल उपभोक्ता आधार स्वास्थ्य क्षेत्र को गति दे रहे हैं।
- भारत 1.4 अरब से अधिक लोगों का बड़ा बाजार उपलब्ध कराता है।
- देश ने कई मुक्त व्यापार समझौते किए हैं जो बाजार पहुंच को बढ़ाते हैं।
- कई फार्मा उत्पादों को इन समझौतों के तहत शुल्क रियायतें प्राप्त हैं।
- भारतीय जेनेरिक दवाएं दुनिया भर के लाखों मरीजों तक पहुंचती हैं।
- भारत वैश्विक स्तर पर सस्ती दवाओं की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैक्सीन आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा भारत से पूरा होता है।
- अमेरिका के बाहर सबसे अधिक US FDA-अनुमोदित दवा निर्माण इकाइयां भारत में हैं।
- हाल के वर्षों में भारत में पेटेंट फाइलिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- Biopharma Shakti जैसी योजनाएं दवा नवाचार को प्रोत्साहित कर रही हैं।
- भारत ने सभी के लिए सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं हेतु वैश्विक सहयोग पर जोर दिया।





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