भारत में 2026–27 रबी सीजन से हर्बिसाइड-टॉलरेंट सरसों की नई संकर किस्मों की बड़े पैमाने पर खेती शुरू होने जा रही है। इन किस्मों को ओरोबैंकी नामक परजीवी खरपतवार से निपटने के लिए विकसित किया गया है, जो सरसों की उपज को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
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- भारत में 2026–27 रबी सीजन से नई हर्बिसाइड-टॉलरेंट सरसों की खेती शुरू होगी।
- ये संकर किस्में इमिडाजोलिनोन (IMI) हर्बिसाइड के प्रति प्रतिरोधी हैं।
- तकनीक का उद्देश्य ओरोबैंकी नामक परजीवी खरपतवार को नियंत्रित करना है।
- ओरोबैंकी सरसों की जड़ों से जुड़कर पानी और पोषक तत्वों को अवशोषित करता है।
- यह खरपतवार लंबे समय से सरसों उत्पादन में बड़ी बाधा माना जाता है।
- सरसों भारत की प्रमुख तिलहनी फसलों में से एक है।
- विशेष रूप से उत्तर भारत के शुष्क क्षेत्रों में इसका महत्व अधिक है।
- सरसों की उत्पादकता बढ़ने से खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
- भारत ने 2024–25 में लगभग 16 मिलियन टन खाद्य तेल आयात किया था।
- इस आयात पर लगभग ₹1.6 लाख करोड़ का खर्च हुआ।
- नई किस्में किसानों को बेहतर खरपतवार प्रबंधन का विकल्प प्रदान करेंगी।
- विशेषज्ञों के अनुसार इससे फसल उत्पादन और उत्पादकता बढ़ सकती है।
- वैज्ञानिकों ने तकनीक के सावधानीपूर्वक उपयोग की सलाह दी है।
- एक ही हर्बिसाइड पर अत्यधिक निर्भरता से खरपतवार में प्रतिरोध विकसित हो सकता है।
- फसल चक्र और विविध खेती पद्धतियों को अपनाने की सिफारिश की गई है।
- संतुलित उपयोग से तकनीक की प्रभावशीलता लंबे समय तक बनाए रखी जा सकती है।





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