राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा और संवैधानिक संरक्षणों की निगरानी के लिए किया गया था।
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- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग 1992 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम लागू होने के बाद एक वैधानिक संस्था बना था।
- आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पांच सदस्य शामिल होते हैं जिनका चयन अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों से किया जाता है।
- मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन समुदायों को भारत में आधिकारिक रूप से अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा प्राप्त है।
- आयोग संवैधानिक सुरक्षा उपायों की निगरानी करता है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े शिकायत मामलों की जांच करता है।
- अल्पसंख्यकों को संविधान में मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति निदेशक तत्वों और मौलिक कर्तव्यों के माध्यम से संरक्षण दिया गया है।
- आयोग प्रत्येक वर्ष 18 दिसंबर को अल्पसंख्यक अधिकार दिवस मनाकर अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।
- सीमित कानूनी शक्तियों और संवैधानिक दर्जे की कमी के कारण कई विशेषज्ञ आयोग को “टूथलेस टाइगर” बताते रहे हैं।
- विशेषज्ञों ने आयोग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए संवैधानिक शक्तियां, तकनीकी सुधार और मजबूत राज्य अल्पसंख्यक आयोगों की सिफारिश की है।





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