महाराष्ट्र सरकार आगामी वर्षा सत्र में महिला कृषक सशक्तिकरण विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है, जिसका उद्देश्य महिला कृषकों को स्वतंत्र वैधानिक पहचान तथा शासकीय योजनाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करना है।
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- महाराष्ट्र सरकार 22 जून से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के वर्षा सत्र में महिला कृषक सशक्तिकरण विधेयक 2026 प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।
- प्रस्तावित विधेयक का प्रमुख उद्देश्य महिला कृषकों को स्वतंत्र वैधानिक पहचान प्रदान करना है, जिससे उन्हें औपचारिक रूप से कृषक के रूप में मान्यता मिल सके।
- इस व्यवस्था के माध्यम से महिला कृषकों की शासकीय कल्याण योजनाओं, संस्थागत सहायता, वित्तीय सुविधाओं तथा कृषि विकास कार्यक्रमों तक पहुंच को सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया जाएगा।
- प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रारंभिक प्रस्तुति की समीक्षा की गई।
- बैठक में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे तथा कृषि राज्य मंत्री आशीष जायसवाल भी उपस्थित रहे।
- विधेयक का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के समक्ष मौजूद लंबे समय से चली आ रही वैधानिक तथा प्रशासनिक बाधाओं को कम करना है।
- स्वतंत्र पहचान मिलने से महिला कृषकों के लिए संस्थागत ऋण, शासकीय लाभ, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा कृषि संबंधी योजनाओं में भागीदारी के अवसर बढ़ सकते हैं।
- यह पहल कृषि क्षेत्र में समान अवसर, आर्थिक सशक्तिकरण तथा महिला सहभागिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण नीतिगत पहल मानी जा रही है।





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