स्वदेशी अनुसंधान, सफल प्रक्षेपास्त्र परीक्षणों और आधुनिक रक्षा आधारभूत संरचना के विस्तार के माध्यम से भारत ने मिशन सुदर्शन चक्र के विकास को नई गति प्रदान की है।
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- मिशन सुदर्शन चक्र का लक्ष्य 2035 तक सैन्य प्रतिष्ठानों, सामरिक परिसंपत्तियों, महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं तथा नागरिक स्थलों के लिए बहुस्तरीय प्रक्षेपास्त्र सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करना है।
- इस अभियान में बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र प्रतिरक्षा, वायु प्रतिरक्षा तथा नौसैनिक प्रहार क्षमता को एकीकृत कर व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना विकसित की जा रही है।
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने 10 और 11 जून 2026 को लगातार तीन सफल प्रक्षेपास्त्र परीक्षण सम्पन्न कर महत्वपूर्ण स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का सत्यापन किया।
- ओडिशा के चांदीपुर स्थित समेकित परीक्षण परिसर से दो उन्नत अवरोधक प्रक्षेपास्त्रों का सफल परीक्षण किया गया, जिससे बहुस्तरीय प्रतिरक्षा क्षमता को बल मिला।
- मध्यम दूरी के नौसैनिक पोतभेदी प्रक्षेपास्त्र का प्रथम परीक्षण नौसैनिक मंच से सम्पन्न हुआ, जिसमें मार्गदर्शन प्रणाली तथा अंतिम चरण की सटीकता का सफल मूल्यांकन किया गया।
- बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र प्रतिरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य शत्रु प्रक्षेपास्त्रों का समय रहते पता लगाना, उनका अनुसरण करना तथा लक्ष्य तक पहुंचने से पूर्व उन्हें निष्क्रिय करना है।
- परियोजना कुशा के अंतर्गत 150 किमी, 250 किमी तथा 350-400 किमी क्षमता वाले स्वदेशी दूरवर्ती अवरोधक विकसित किए जा रहे हैं, जो इस अभियान का महत्वपूर्ण आधार हैं।
- 12 जून 2026 को हैदराबाद स्थित उन्नत आयुध प्रणाली परिसर के उद्घाटन से स्वदेशी प्रक्षेपास्त्र अनुसंधान, विकास और एकीकृत प्रतिरक्षा निर्माण को नई मजबूती मिलने की अपेक्षा है।
- इस अभियान का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना तथा सैन्य संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और स्वदेशी उद्योगों के बीच समन्वित विकास सुनिश्चित करना है।
- 2,000 किमी से 5,000 किमी दूरी तक मार करने वाले मध्यम दूरी के बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्रों से निपटने के लिए उन्नत अवरोधक क्षमता इस योजना का महत्वपूर्ण अंग मानी जाती है।





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