लॉर्ड रिपन ने भारत के वायसराय के रूप में शासन, शिक्षा और न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार किए, जिनका भारतीय प्रशासनिक ढांचे पर गहरा प्रभाव पड़ा।
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- लॉर्ड रिपन ने कारखाना अधिनियम 1881 लागू किया, जिसके माध्यम से श्रमिकों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के कार्य घंटे, सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों में सुधार किया गया।
- मैसूर पुनर्स्थापन के माध्यम से 1881 में शासन को उसके वैध शासक के अधीन वापस सौंपा गया, जिससे स्थानीय प्रशासन को पुनर्जीवित किया गया।
- उन्होंने 1882 में स्थानीय भाषा समाचार पत्र अधिनियम को समाप्त किया, जिससे भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अधिकार मिला।
- शिक्षा सुधार के लिए 1882 में एक आयोग की स्थापना की गई, जिसने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के विस्तार तथा शिक्षण गुणवत्ता में सुधार पर बल दिया।
- 1882 में स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था लागू की गई, जिससे नगर निकायों और जिला स्तर पर जनभागीदारी को बढ़ावा मिला।
- इल्बर्ट विधेयक के माध्यम से भारतीय न्यायाधीशों को यूरोपीय आरोपियों के मामलों की सुनवाई का अधिकार देने का प्रयास किया गया, जिसे तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा।
- भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु एक आयोग का गठन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कृषकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
- लॉर्ड रिपन के उदार सुधारों ने प्रशासनिक परिवर्तन, न्यायिक समानता और भारतीयों की शासन में भागीदारी को मजबूत किया।





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