जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने ‘क्लियर’ नामक नई प्रोटीन इमेजिंग तकनीक विकसित की है, जो कैंसर, तंत्रिका संबंधी रोगों और सटीक चिकित्सा अनुसंधान में महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
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- जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने उन्नत प्रोटीन इमेजिंग हेतु नई ‘क्लियर’ तकनीक विकसित की है।
- ‘क्लियर’ तकनीक का पूरा नाम “क्लीवेबल लाइट इरेज़्ड एंटीबॉडी रिपोर्टर” है, जो एक ही जैविक नमूने में बार-बार प्रोटीन इमेजिंग संभव बनाती है।
- यह तकनीक एक ही प्रकाश संकेतक प्रणाली के माध्यम से बड़ी संख्या में प्रोटीनों की पहचान और मानचित्रण करने में सक्षम है।
- वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रणाली पारंपरिक प्रोटीन मानचित्रण तकनीकों की प्रमुख सीमाओं को दूर करती है।
- इस तकनीक में विशेष प्रकाश-संवेदनशील जांच प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे प्रत्येक इमेजिंग चक्र के बाद प्रकाश संकेत मिटाया जा सकता है।
- वैज्ञानिक एक ही कोशिका या ऊतक नमूने में अलग-अलग प्रोटीनों को बार-बार चिन्हित, मिटाकर पुनः इमेजिंग कर सकते हैं।
- यह तकनीक वैज्ञानिक सरित एस अग्रवाल के नेतृत्व में विकसित की गई तथा भारतीय विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने भी इसमें सहयोग किया।
- शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया की तुलना ऐसे श्यामपट से की है जिसे बार-बार मिटाकर पुनः उपयोग किया जा सकता है।
- यह तकनीक कोशिकाओं, ऊतकों और जटिल जैविक प्रणालियों में उच्च-रिज़ॉल्यूशन बहु-स्तरीय इमेजिंग की सुविधा प्रदान करती है।
- वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक कैंसर विज्ञान, प्रतिरक्षा विज्ञान और तंत्रिका विज्ञान अनुसंधान में महत्वपूर्ण प्रगति ला सकती है।
- यह प्रणाली रोगों की प्रारंभिक पहचान, प्रतिरक्षा तंत्र विश्लेषण और कोशिकीय गतिविधियों को बेहतर समझने में भी सहायक हो सकती है।
- वैज्ञानिकों के अनुसार भविष्य में यह तकनीक सटीक चिकित्सा और व्यक्तिगत उपचार प्रणाली को मजबूत बनाने में योगदान दे सकती है।
- इस शोध के निष्कर्ष रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री की वैज्ञानिक पत्रिका “केमिकल साइंस” में प्रकाशित किए गए हैं।





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