अरुणाचल प्रदेश के जंगलों में 188 वर्ष बाद दुर्लभ जंगली ब्लूबेरी संबंधी पौधे वैक्सिनियम पिलिफेरम की दोबारा खोज हुई है, जिसने पूर्वी हिमालय की जैव विविधता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
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- वैज्ञानिकों ने अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के विजयनगर क्षेत्र के जंगलों में वैक्सिनियम पिलिफेरम प्रजाति की 188 वर्ष बाद दोबारा खोज की है।
- यह प्रजाति ब्लूबेरी पौधों की जंगली संबंधी मानी जाती है और यह एरिकेसी कुल के वैक्सिनियम वंश से संबंधित है।
- इस पौधे को पहली बार 1836 में वनस्पति वैज्ञानिक विलियम ग्रिफिथ ने मिश्मी पहाड़ियों में दर्ज किया था।
- बाद में 1850 में जोसेफ डाल्टन हूकर और टी. थॉमसन ने मेघालय की खासी पहाड़ियों में इसका पुनः उल्लेख किया था।
- इसके बाद लगभग 188 वर्षों तक इस प्रजाति का कोई प्रमाणित वैज्ञानिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
- यह खोज शिक्षा एवं पर्यावरण विकास संस्था तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के उत्तर-पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए सर्वेक्षण के दौरान हुई।
- यह दुर्लभ लता सदृश पौधा नोआ-दिहिंग नदी की सहायक धाराओं के पास 1150 से 1280 मीटर की ऊंचाई पर पाया गया।
- वैज्ञानिकों को लगभग 2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में इस प्रजाति के केवल 16 पौधे मिले हैं।
- अत्यंत सीमित संख्या के कारण इस प्रजाति को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की संकटग्रस्त सूची में शामिल किया गया है।
- इस पुनः खोज से संबंधित शोध पत्र 18 मई 2026 को फेड्डेस रिपर्टोरियम पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
- अरुणाचल प्रदेश पूर्वी हिमालय जैव विविधता क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।





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