नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिन्द फ़ौज भारत की सशस्त्र स्वतंत्रता लड़ाई का बड़ा प्रतीक बनी, जबकि लाल किला मुकदमों और नौसैनिक विद्रोह ने पूरे देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रवादी लहर को तेज कर दिया।
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- आज़ाद हिन्द फ़ौज का पुनर्गठन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए किया था।
- नेताजी ने 1943 में सिंगापुर में आज़ाद हिन्द फ़ौज को संगठित कर लगभग 60,000 सैनिकों वाली राष्ट्रवादी सैन्य शक्ति में बदल दिया।
- आज़ाद हिन्द फ़ौज में महिलाओं की प्रसिद्ध रानी झाँसी रेजिमेंट भी शामिल थी जिसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया।
- आज़ाद हिन्द फ़ौज ने जापानी सेना के साथ मिलकर अंडमान द्वीप और मणिपुर के कुछ क्षेत्रों पर अस्थायी नियंत्रण स्थापित किया।
- द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद 1945 में ब्रिटिश सरकार ने आज़ाद हिन्द फ़ौज अधिकारियों पर ऐतिहासिक लाल किला मुकदमे चलाए।
- शाहनवाज़ ख़ान, प्रेम सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों पर चले मुकदमों ने पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रवादी समर्थन पैदा किया।
- लाल किला मुकदमों के बाद बढ़ते जनआक्रोश ने फरवरी 1946 के रॉयल भारतीय नौसेना विद्रोह को भी प्रभावित किया।
- आज़ाद हिन्द फ़ौज मुकदमों और नौसैनिक विद्रोह के बाद बढ़ते आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को कमजोर किया और भारत की स्वतंत्रता का मार्ग तेज किया।





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