अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान शांति प्रयासों और पश्चिम एशिया स्थिरता के तहत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की है।
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- डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर, मिस्र, जॉर्डन और तुर्किये से अब्राहम समझौते में शामिल होने का आग्रह किया।
- अब्राहम समझौता इज़राइल और मुस्लिम बहुल देशों के बीच राजनयिक तथा आर्थिक संबंध सामान्य करने वाला समझौता है।
- अब्राहम समझौते पर पहली बार सितंबर 2020 में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने हस्ताक्षर किए थे।
- बाद में मोरक्को और सूडान भी इस समझौते में शामिल हुए जबकि 2025 में कज़ाख़स्तान ने भी इसमें भागीदारी की।
- अब्राहम समझौते से पहले केवल मिस्र और जॉर्डन ही ऐसे मुस्लिम बहुल देश थे जिनके इज़राइल के साथ औपचारिक संबंध थे।
- फ़िलिस्तीनी नेतृत्व ने इस समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के बिना अरब देशों ने इज़राइल से संबंध स्थापित किए।
- अब्राहम समझौते के बाद इज़राइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग में तेज वृद्धि हुई।
- सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के लिए ठोस मार्ग बनने के बाद ही इज़राइल के साथ पूर्ण संबंध संभव होंगे।





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