भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली अब भी औपनिवेशिक कानूनों पर आधारित है और बहुत कम दोषसिद्धि दर के कारण आलोचना झेल रही है। मात्र 16% दोषसिद्धि के साथ, सरकार मलिमठ समिति (2003) की रिपोर्ट को फिर से लागू करने पर विचार कर रही है।
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- भारत में दोषसिद्धि दर लगभग 16%; प्रणाली की विफलता दर्शाती
- CJS अब भी ब्रिटिश काल के पुराने कानूनों पर आधारित
- अपराध जटिल हुए; तकनीक के कारण जांच और कठिन
- जेलों में 67% कैदी अंडरट्रायल; न्याय प्रक्रिया बेहद धीमी
- मलिमठ समिति ने 2003 में 158 सुधार सुझाए
- मुख्य प्रस्ताव: अधिक जज, विशेष क्रिमिनल डिवीजन, पीड़ित-केंद्रित न्याय
- जांच में inquisitorial प्रणाली और गवाह संरक्षण का सुझाव
- राष्ट्रीय न्यायिक आयोग और अलग अभियोजन ढांचे की सिफारिश
- कुछ सुझाव विवादित: पुलिस स्वीकारोक्ति, प्रमाण मानक कम करना
- सरकार द्वारा आंशिक सुधार: विडियोग्राफी, नए अपराध, पुलिस आधुनिकीकरण





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