भारत की विमानन और अंतरिक्ष क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि स्वदेशी गगन मार्गदर्शन प्रणाली सुरक्षित विमान संचालन और तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत कर रही है।
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- भारत का विमानन क्षेत्र कम लागत वाले निर्माण, कुशल अभियंताओं और स्वदेशी तकनीकों के माध्यम से वैश्विक विमानन तथा अंतरिक्ष आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ रहा है।
- बोइंग और एयरबस भारत से प्रतिवर्ष लगभग 1.4 से 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर की सामग्री प्राप्त करते हैं, जिससे घरेलू कंपनियों के अवसर बढ़ रहे हैं।
- गगन को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से विकसित किया है, जो उपग्रह आधारित मार्गदर्शन व्यवस्था है।
- 2015 से पूरी तरह कार्यरत गगन भारत को उपग्रह आधारित संवर्धित मार्गदर्शन व्यवस्था संचालित करने वाले चुनिंदा देशों में स्थान देता है।
- जून 2026 में नागर विमानन महानिदेशालय ने गगन की सहायता से वाणिज्यिक विमान पर भारत का पहला उपग्रह आधारित अवतरण परीक्षण सफलतापूर्वक किया।
- गगन में 15 संदर्भ केंद्र, 2 मुख्य नियंत्रण केंद्र और 3 संकेत प्रेषण केंद्र हैं, जिन्हें संचार व्यवस्था और भूस्थिर उपग्रहों का समर्थन मिलता है।
- गगन का उपयोग विमानन के अलावा समुद्री मार्गदर्शन, सड़क परिवहन, रेल परिवहन, आपदा प्रबंधन, रक्षा, दूरसंचार, सर्वेक्षण और मानचित्रण में किया जा सकता है।
- गगन स्वदेशी नाविक व्यवस्था का पूरक है, जबकि नाविक भारत और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति, मार्गदर्शन तथा समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराता है।
- भारत की उपग्रह मार्गदर्शन व्यवस्था का अंतरराष्ट्रीय विस्तार हो रहा है और 2025 में दक्षिण अफ्रीका में संदर्भ केंद्र स्थापित करने का समझौता हुआ।
- गगन का विकास भारत के घरेलू क्षमता निर्माण से उच्च मूल्य वाली तकनीक, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अधिक स्वदेशी योगदान की ओर बढ़ने को दर्शाता है।





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