बिमको-आईसीएस नाविक कार्यबल प्रतिवेदन 2026 के अनुसार भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता बन गया है। वैश्विक समुद्री कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी 12.16 प्रतिशत पहुंच गई है, जो देश की बढ़ती समुद्री क्षमता और कौशल का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
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- बिमको-आईसीएस नाविक कार्यबल प्रतिवेदन 2026 के अनुसार भारत 3,11,936 नाविकों के साथ विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता बन गया है और वैश्विक समुद्री कार्यबल में उसकी हिस्सेदारी 12.16 प्रतिशत है।
- फिलीपींस अब भी विश्व का सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जबकि भारत 2015 में पांचवें स्थान से आगे बढ़कर 2026 में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
- भारत ने 1,40,718 जहाज अधिकारियों की आपूर्ति की, जो वैश्विक अधिकारी कार्यबल का 13.41 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त 1,71,218 नाविक श्रेणी के कर्मियों की भागीदारी वैश्विक स्तर पर 11.29 प्रतिशत रही।
- जहाज अधिकारी जहाज पर संचालन, नौवहन, अभियांत्रिकी तथा प्रबंधन की जिम्मेदारियां निभाते हैं, जबकि नाविक श्रेणी के कर्मी परिचालन, तकनीकी, रखरखाव और सहायक कार्यों का संचालन करते हैं।
- भारत सरकार मिशन 20 प्रतिशत के माध्यम से वैश्विक नाविक कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए समुद्री प्रशिक्षण क्षमता, जहाजों पर रोजगार अवसर और डिजिटल सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
- भारत में नाविकों की संख्या 2010 के 62,267 से बढ़कर 2025 में 3,23,429 हो गई है, जो समुद्री शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाती है।
- भारतीय समुद्री क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। 2021 में लगभग 1,600 महिला नाविकों की संख्या बढ़कर 2025 में 7,000 से अधिक हो गई, जिससे समुद्री क्षेत्र में लैंगिक समावेशन को बढ़ावा मिला है।
- इस उपलब्धि के बावजूद समुद्री श्रमिकों का कल्याण एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। 2025 में विश्वभर में परित्यक्त 6,223 नाविकों में से 1,125 भारतीय थे, जिससे समुद्री श्रम सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।





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