भारत ने विश्व व्यापार संगठन में सौर और प्रौद्योगिकी क्षेत्र सहायता उपायों को लेकर चीन की विवाद निपटान पैनल गठन मांग को रोक दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया है।
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- भारत ने विश्व व्यापार संगठन में चीन की उस प्रारंभिक मांग का विरोध किया जिसमें सौर और प्रौद्योगिकी क्षेत्र विवाद के लिए पैनल गठन की मांग की गई थी।
- चीन का आरोप है कि भारत की आयात शुल्क संरचना और घरेलू खरीद नीतियां चीनी सौर मॉड्यूल, सेल तथा प्रौद्योगिकी उत्पादों के खिलाफ भेदभाव करती हैं।
- यह विवाद भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय वार्ताओं के असफल रहने के बाद विश्व व्यापार संगठन स्तर तक पहुंचा है।
- भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी औद्योगिक सहायता और घरेलू विनिर्माण नीतियां विश्व व्यापार संगठन के सभी नियमों के अनुरूप हैं।
- चीन ने यह मामला पिछले वर्ष दिसंबर में भारत की घरेलू सौर विनिर्माण प्रोत्साहन योजनाओं को लेकर औपचारिक रूप से दायर किया था।
- भारत ने प्रक्रिया संबंधी अधिकार का उपयोग करते हुए पहली बार पैनल गठन प्रस्ताव को रोका, हालांकि चीन भविष्य की बैठक में दोबारा प्रस्ताव रख सकता है।
- यह विवाद वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण, अर्धचालक उत्पादन और रणनीतिक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला प्रतिस्पर्धा को भी दर्शाता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला भविष्य में हरित ऊर्जा सब्सिडी, घरेलू उत्पादन प्रोत्साहन और वैश्विक व्यापार नीतियों को प्रभावित कर सकता है।





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