भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि ढांचे के स्थगन के बाद चेनाब नदी पर दो हजार छह सौ करोड़ रुपये की जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया है, जिससे ऊर्जा और जल संसाधन नीति में बड़ा बदलाव संकेतित होता है।
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- भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि ढांचे को स्थगित करने के बाद चेनाब नदी पर लगभग दो हजार छह सौ करोड़ रुपये की जलविद्युत परियोजनाएं तेज की हैं।
- इन परियोजनाओं का उद्देश्य 1960 की सिंधु जल संधि के तहत आवंटित पश्चिमी नदियों के जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।
- इन जलविद्युत परियोजनाओं के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी NHPC Limited को सौंपी गई है, जो चेनाब बेसिन में कार्य करेगी।
- यह पहल उत्तरी भारत में बड़े पैमाने पर जलविद्युत अवसंरचना विकसित कर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की सरकारी रणनीति का हिस्सा है।
- सिंधु जल संधि, जिसे World Bank की मध्यस्थता में 1960 में लागू किया गया था, भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे को नियंत्रित करती है।
- चेनाब बेसिन को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां कई जलविद्युत परियोजनाएं पहले से संचालित और निर्माणाधीन हैं।
- इस परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ने, क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे के विकास और स्थानीय रोजगार सृजन की संभावना है।
- विशेषज्ञ इसे भारत की सीमा-पार जल संसाधन उपयोग नीति में अधिक सक्रिय और रणनीतिक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।





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