भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आयोजित तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, अंतरिक्ष, निवेश और आपूर्ति शृंखला सहयोग को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौते और नई पहल की घोषणा की गई।
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- भारत और ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करते हुए रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी तथा निवेश सहयोग को नई दिशा दी।
- दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा, समुद्री सुरक्षा सहयोग रूपरेखा तथा तटरक्षक बलों के बीच समझौते को अपनाकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।
- असैन्य परमाणु सहयोग व्यवस्था को लागू करते हुए ऑस्ट्रेलिया से भारत को दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ तथा ऊर्जा सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली।
- साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आपूर्ति शृंखला और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग बढ़ाने के लिए नई साझेदारियां शुरू की गईं तथा त्रिपक्षीय प्रौद्योगिकी पहल को भी आगे बढ़ाया गया।
- ऑस्ट्रेलियाई निवेश को भारत के अवसंरचना क्षेत्र में बढ़ावा देने के साथ शिक्षा सहयोग के तहत ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने की अनुमति प्रदान की गई।
- अंतरिक्ष सहयोग के अंतर्गत ऑस्ट्रेलिया ने गगनयान मिशन के लिए ट्रैकिंग सहायता देने की घोषणा की, जबकि खेल, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान संरक्षण में भी सहयोग का विस्तार किया गया।
- दोनों देशों ने मुक्त, सुरक्षित और नियम आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए रक्षा अभ्यास, समुद्री निगरानी और आपूर्ति शृंखला लचीलापन बढ़ाने पर जोर दिया।
- दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने, व्यापार बाधाओं को कम करने तथा महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।





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