भारत सरकार अधिनियम 1919, जिसे मोंटेग–चेम्सफोर्ड सुधार भी कहा जाता है, ब्रिटिश शासनकाल में भारतीयों को शासन में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। इसने “द्वैध शासन” (Diarchy) की व्यवस्था और सीमित स्वशासन की अवधारणा को जन्म दिया, परंतु वास्तविक सत्ता अब भी अंग्रेज़ों के पास रही।
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- अधिनियम का उद्देश्य भारतीयों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना था।
- मोंटेग–चेम्सफोर्ड रिपोर्ट (1918) पर आधारित, स्वशासन की दिशा में पहला कदम।
- प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन प्रणाली (Diarchy) लागू की गई।
- ट्रांसफर किए गए विषय (शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय शासन) भारतीय मंत्रियों को दिए गए।
- रिज़र्व विषय (पुलिस, न्याय, राजस्व) अंग्रेज़ गवर्नर के नियंत्रण में रहे।
- केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल — विधान सभा और राज्यों की परिषद का गठन।
- साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व बढ़ाया गया — सिख, यूरोपीय, एंग्लो-इंडियन आदि को शामिल किया गया।
- लोक सेवा आयोग की स्थापना पहली बार की गई; लंदन में उच्चायुक्त का पद बनाया गया।
- सीमित मताधिकार (Franchise) दिया गया, कुछ महिलाओं को भी आर्थिक आधार पर मतदान का अधिकार मिला।
- कमियां: गवर्नरों के पास वास्तविक शक्ति रही; मंत्रियों की भूमिका प्रतीकात्मक रही; साम्प्रदायिकता को बढ़ावा मिला।
- इस अधिनियम के तहत 10 वर्षों बाद समीक्षा हेतु साइमन कमीशन (1927) गठित हुआ।





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