उसके बाद वॉरेन हेस्तिंग्स, चार्ल्स कॉर्नवालिस समेत अन्य शासकों ने न्यायाधीश और राजस्वीय प्राधिकरणों को अलग किया। अंततः 1861 के भारतीय हाई कोर्ट अधिनियम से न्यायिक प्रणालियों को एकीकृत किया गया।
BulletsIn
- कंपनी ने 1726 में मद्रास, बॉम्बे, कलकत्ता में सामान्य-कानून आधारित न्यायालय स्थापित किए।
पूर्व-औपनिवेशिक समय में न्याय अक्सर पंचायत, जमींदार या क़ाज़ी-मुफ्ती द्वारा दी जाती थी; एकरूप व्यवस्था नहीं थी। - हेस्तिंग्स के तहत: जिला दीवानी अदालतें (न्यायिक) और फ़ौज़दारी अदालतें (अपराध-न्याय) बनाई गईं; सदर निज़ामत अदालत ने बड़ी आपीलों का काम संभाला।
- कॉर्नवालिस सुधारों (1787-93) में राजस्व से न्याय को अलग किया गया; कलेक्टर की न्यायिक भूमिका समाप्त हुई; जिला न्यायाधीश की पदस्थापना हुई।
- 1833 के चार्टर अधिनियम ने भारतीय कानून आयोग बनवाया, जिसके चलते IPC (1860), CrPC (1862) जैसे कोड बने।
- 1861 के भारतीय हाई कोर्ट अधिनियम से बॉम्बे, मद्रास, कलकत्ता में हाई कोर्ट बने, सदर अदालतों व सुप्रीम कोर्ट को बदल दिया गया।
- 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट ने 1937 में फेडरल कोर्ट बनाया, जो स्वतंत्रता के बाद सुप्रीम कोर्ट बना।
- सकारात्मक पक्ष: कानून का एकीकरण, न्याय प्रणाली का विस्तार, सर्व-नागरिक एवं यूरोपीय दोनों को कवर किया गया।
- नकारात्मक पक्ष: न्याय प्रक्रिया जटिल हुई, खर्चे बढ़े, लंबित मामले बढ़े, यूरोपीय न्यायाधीशों को भारतीय रीति-रिवाजों की समझ नहीं थी।





What do you think?
It is nice to know your opinion. Leave a comment.