भारत में साम्यवादी आंदोलन की शुरुआत 1920 में ताशकंद में एम.एन. रॉय और उनके साथियों द्वारा हुई। यह आंदोलन जल्दी ही विभिन्न प्रांतों में फैल गया, मजदूर-किसान राजनीति को संगठित किया और राष्ट्रीय आंदोलन के विचारधारा पक्ष को प्रभावित किया। कई प्रमुख साजिश केसों ने इसे औपनिवेशिक भारत के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बनाया।
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* 1920 ताशकंद में एम.एन. रॉय, अबानी मुखर्जी आदि द्वारा स्थापना
* रॉय 1919 में मेक्सिको की कम्युनिस्ट पार्टी से भी जुड़े थे
* बंगाल, बॉम्बे, मद्रास, यूपी, पंजाब में शुरुआती संगठन बने
* ब्रिटिश शासन ने कानपुर कम्युनिस्ट साजिश केस (1924) दायर किया
* केस ने भारत में साम्यवाद के प्रसार को तेज किया
* कानपुर सम्मेलन (1925) में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की स्थापना
* 1934 में कोमिन्टर्न ने CPI को भारतीय शाखा के रूप में मान्यता दी
* CPI ने सशस्त्र प्रतिरोध का रुझान अपनाया; अहिंसक मार्ग की आलोचना
* बैंक, उद्योग, जहाज़रानी, ज़मींदारी के राष्ट्रीयकरण की मांग
* गांधी–इरविन समझौते और सिविल नाफरमानी पर कड़ा विरोध
* मेरठ साजिश केस (1929–33) ट्रेड यूनियन वृद्धि पर ब्रिटिश प्रतिक्रिया
* आंदोलन ने मजदूर, किसान व कांग्रेस राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला





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