भारत में साम्यवादी आंदोलन की शुरुआत 1920 में ताशकंद में एम.एन. रॉय और उनके साथियों द्वारा हुई। यह आंदोलन जल्दी ही विभिन्न प्रांतों में फैल गया, मजदूर-किसान राजनीति को संगठित किया और राष्ट्रीय आंदोलन के विचारधारा पक्ष को प्रभावित किया। कई प्रमुख साजिश केसों ने इसे औपनिवेशिक भारत के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बनाया।




