चापेकर बंधुओं द्वारा 1897 में ब्रिटिश अधिकारी वॉल्टर चार्ल्स रैंड की हत्या ने भारत में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद और अंग्रेज विरोधी आंदोलन को नई दिशा दी।
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- दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर और वासुदेव हरि चापेकर महाराष्ट्र के पुणे के निकट चिंचवड़ के चितपावन ब्राह्मण परिवार से संबंधित थे।
- पुणे में ब्यूबोनिक प्लेग फैलने के दौरान ब्रिटिश प्रशासन की दमनकारी नीतियों के विरोध में चापेकर बंधु प्रमुख क्रांतिकारी के रूप में उभरे थे।
- ब्रिटिश अधिकारी वॉल्टर चार्ल्स रैंड ने स्पेशल प्लेग कमेटी का नेतृत्व करते हुए कठोर तलाशी और जबरन कार्रवाई अभियान चलाया था।
- प्लेग नियंत्रण के नाम पर सैनिकों द्वारा घरों में घुसने, महिलाओं की सार्वजनिक तलाशी लेने और धार्मिक भावनाएं आहत करने से जनता में भारी आक्रोश फैल गया।
- 22 जून 1897 को महारानी विक्टोरिया के डायमंड जुबली समारोह के दौरान चापेकर बंधुओं ने रैंड और लेफ्टिनेंट एयर्स्ट की हत्या की योजना बनाई।
- दामोदर हरि चापेकर ने रैंड पर गोली चलाई, जबकि बालकृष्ण हरि चापेकर ने उसके सुरक्षा अधिकारी लेफ्टिनेंट एयर्स्ट पर हमला किया था।
- ब्रिटिश जांच अभियान के बाद प्रशासन ने चापेकर बंधुओं को गिरफ्तार किया और दामोदर को 1898 में तथा बालकृष्ण और वासुदेव को 1899 में फांसी दी।
- चापेकर बंधुओं के साहसिक कार्य ने आने वाले क्रांतिकारियों को प्रेरित किया और भारत में उग्र राष्ट्रवादी आंदोलन को नई गति प्रदान की।





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