ईंधन कीमतों में तेजी, कच्चे तेल के बढ़ते दाम और सप्लाई संकट के बीच भारत में थोक महंगाई दर जल्द 10% पार कर सकती है।
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- सिस्टेमेटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत में डब्ल्यूपीआई महंगाई दर का 10% पार करना अब निकट भविष्य की वास्तविक संभावना बन चुका है।
- अप्रैल 2026 में भारत की थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 8.3% पर पहुंच गई, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।
- ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई दर 24.71% तक पहुंच गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक कच्चे तेल कीमतों में भारी बढ़ोतरी रही।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जबकि आगे और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।
- रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान ईंधन मूल्य वृद्धि से लगभग ₹1.8 ट्रिलियन के कुल अंडर-रिकवरी नुकसान का केवल 7% से 8% हिस्सा ही पूरा हुआ है।
- 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने कच्चे तेल के दाम, एल नीनो प्रभाव और उर्वरक संकट खाद्य महंगाई और कृषि लागत बढ़ा सकते हैं।
- विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि लगातार ऊंची महंगाई, धीमी आर्थिक वृद्धि और बढ़ते व्यापार घाटे से अर्थव्यवस्था में स्टैगफ्लेशन जैसी स्थिति बन सकती है।
- रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती महंगाई के कारण भारतीय रिजर्व बैंक को दोबारा ब्याज दरों में वृद्धि करनी पड़ सकती है।





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