असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में बीफ के सेवन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला 4 दिसंबर 2024 को कैबिनेट बैठक के बाद लिया गया। इसका प्रभाव रेस्टोरेंट्स और सामुदायिक महोत्सवों पर पड़ेगा। यह कदम कांग्रेस के नेताओं द्वारा बीफ से संबंधित दिए गए बयानों के बाद उठाया गया है।
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- मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में रेस्टोरेंट्स और सामुदायिक समारोहों में बीफ के सेवन पर प्रतिबंध लगाया।
- यह फैसला होटलों, रेस्टोरेंट्स और सामुदायिक कार्यक्रमों पर लागू होगा, चाहे वह धार्मिक हो या अन्य।
- यह कदम कांग्रेस के नेताओं के बयानों के बाद लिया गया, जिनमें भाजपा पर “बीफ देने” का आरोप था।
- असम कैटल प्रिजर्वेशन एक्ट 2021 में नए प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव है, जो सेवन पर नियम लागू करेंगे।
- इस कानून के तहत, हिंदू, जैन, सिख और अन्य बीफ न खाने वाले समुदायों वाले क्षेत्रों में बीफ की बिक्री पर प्रतिबंध है।
- कांग्रेस के नेता भुपेन बोरा और रकीबुल हुसैन बीफ पर अपनी असहमति व्यक्त कर चुके हैं।
- सरमा का कहना है कि नया कानून कांग्रेस के सवालों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।
- असम कैटल प्रिजर्वेशन एक्ट में गाय के कत्ल पर प्रतिबंध था, जबकि भैंस को “फिट फॉर स्लॉटर” प्रमाणपत्र के साथ मारा जा सकता था।
- यह फैसला समागुरी बाईपोल के बाद आया, जहां बीफ पर चर्चा हुई थी।
- आलोचकों का कहना है कि यह फैसला राजनीतिक है, जो भविष्य में चुनाव को प्रभावित कर सकता है।





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