अक्टूबर और नवंबर के महीनों में दिल्ली में वायु और जल प्रदूषण की समस्या गहरी हो जाती है, जिसमें यमुना नदी का झाग प्रमुख है। यह झाग प्रदूषकों और बिना साफ किए सीवेज के कारण बनता है, और मानसून के बाद स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे जल गुणवत्ता और वायु प्रदूषण दोनों पर असर पड़ता है।
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- यमुना का झाग प्रदूषकों, बिना साफ किए सीवेज के कारण होता है।
- आईआईटी कानपुर अध्ययन ने डिटर्जेंट्स और फॉस्फेट्स को मुख्य कारण बताया।
- प्रतिदिन 3.5 बिलियन लीटर सीवेज यमुना में गिरता है; केवल 35-40% साफ होता है।
- सर्दियों में जल स्तर घटने और ठंडे मौसम के कारण झाग स्थिर रहता है।
- सर्फेक्टेंट पानी की सतह पर तनाव कम करके झाग बनाते हैं।
- फिलामेंटस बैक्टीरिया सर्फेक्टेंट छोड़कर झाग बढ़ाते हैं।
- उत्तर प्रदेश की फैक्ट्रियों से आए प्रदूषक समस्या को बढ़ाते हैं।
- झाग वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) छोड़ता है, जो वायु प्रदूषण में योगदान करते हैं।
- ये VOCs हवा में घुलकर स्मॉग और दिल्ली की वायु गुणवत्ता को और खराब करते हैं।
- झाग से जलीय जीवन प्रभावित होता है, ऑक्सीजन की कमी और पारिस्थितिक असंतुलन होता है।





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