अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का प्रस्ताव नियुक्ति प्रक्रिया में एकरूपता लाने, रिक्तियों को कम करने और न्यायपालिका की दक्षता व पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
BulletsIn
- 1950 के दशक में विधि आयोग ने न्यायिक नियुक्तियों में समान मानक स्थापित करने हेतु AIJS का सुझाव दिया।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 312 में 1976 के संशोधन द्वारा इसके गठन का प्रावधान जोड़ा गया।
- प्रस्ताव के अनुसार जिला न्यायाधीशों की भर्ती अखिल भारतीय परीक्षा के माध्यम से की जाएगी।
- सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक सुधार के संदर्भ में AIJS के गठन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है।
- समर्थकों का मत है कि इससे लंबित मामलों में कमी, पारदर्शिता और योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित होगा।
- विरोधियों के अनुसार स्थानीय कानून, भाषाई विविधता तथा संघीय ढांचे से संबंधित चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
- व्यापक सहमति, प्रशिक्षण सुधार और संरचनात्मक संतुलन के साथ AIJS को प्रभावी बनाया जा सकता है।





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