भारत नई परियोजनाओं, अनुसंधान और नीतिगत सहयोग के माध्यम से भू-तापीय ऊर्जा विकसित कर विश्वसनीय तथा कम कार्बन वाली ऊर्जा बढ़ाना चाहता है।
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- भारत लगभग 10.6 गीगावाट की अनुमानित भू-तापीय क्षमता का उपयोग कर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में विविधता और विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाना चाहता है।
- सितंबर 2025 में अधिसूचित राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति देश के संसाधनों की व्यवस्थित खोज, विकास और उपयोग के लिए ढांचा प्रदान करती है।
- तेल और प्राकृतिक गैस निगम ऊर्जा केंद्र ने लद्दाख की पूगा घाटी में देश के पहले दो भू-तापीय कुएं शुरू किए हैं।
- भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 381 गर्म जलस्रोतों का मानचित्रण किया और 10 भू-तापीय क्षेत्रों में बिजली तथा प्रत्यक्ष ताप उपयोग की संभावनाएं पहचानी हैं।
- भू-तापीय ऊर्जा मौसम से काफी हद तक स्वतंत्र होकर लगातार बिजली दे सकती है और ताप, शीतलन तथा कृषि कार्यों में उपयोगी हो सकती है।
- भारत उन्नत भू-तापीय प्रणालियों और अनुपयोगी तेल तथा प्राकृतिक गैस कुओं के पुनः उपयोग की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है।
- गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और हैदराबाद में सरकारी सहायता वाली परियोजनाएं बिजली उत्पादन, संयुक्त सौर भू-तापीय व्यवस्था और भू-तापीय शीतलन का परीक्षण कर रही हैं।
- भारत अनुसंधान, आंकड़ा भंडार, प्रायोगिक परियोजनाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भू-तापीय तकनीक के विकास को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
- देश में भू-तापीय ऊर्जा अभी शुरुआती चरण में है और बड़े व्यावसायिक स्तर पर बिजली उत्पादन की व्यवस्था स्थापित होना बाकी है।
- विश्व में 2025 के अंत तक भू-तापीय बिजली क्षमता 15.67 गीगावाट पहुंची, जिसमें पांच प्रमुख देशों की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत रही।
- भू-तापीय ऊर्जा सौर और पवन ऊर्जा की पूरक बनकर विश्वसनीय नवीकरणीय बिजली दे सकती है तथा ताप, शीतलन और कृषि में सहायता कर सकती है।
- वर्ष 2070 के शुद्ध शून्य लक्ष्य की दिशा में भू-तापीय ऊर्जा भारत की दीर्घकालिक स्वदेशी स्वच्छ ऊर्जा व्यवस्था का अतिरिक्त आधार बन सकती है।





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