भारत का मत्स्य क्षेत्र रिकॉर्ड उत्पादन, बढ़ते समुद्री खाद्य निर्यात, आधुनिक पालन तकनीकों और करोड़ों लोगों की आजीविका के कारण आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है।
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- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत योगदान देता है।
- मत्स्य क्षेत्र देश के लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मछली पालकों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।
- वर्ष 2015 से सरकार ने प्रमुख मत्स्य और जलीय कृषि योजनाओं के तहत 39,272 करोड़ रुपये से अधिक निवेश स्वीकृत किया है।
- वार्षिक मछली उत्पादन 2013-14 के 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 198 लाख टन पहुंच गया।
- इसी अवधि में अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि उत्पादन में 147 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
- भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 2013-14 के 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 73,890 करोड़ रुपये पहुंच गया।
- पुनर्चक्रीय जलीय कृषि प्रणालियां 90-95 प्रतिशत तक पानी का पुनः उपयोग कर सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन को संभव बनाती हैं।
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 9,467 पुनर्चक्रीय इकाइयों और 4,573 जैवपुंज इकाइयों को 4,120 करोड़ रुपये के निवेश से स्वीकृति मिली।
- जम्मू कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में उन्नत प्रणालियों का उपयोग ठंडे जल क्षेत्रों में ट्राउट पालन के लिए बढ़ रहा है।
- आधुनिक तकनीक आधारित पालन से जल संरक्षण, उत्पादकता वृद्धि और उच्च मूल्य वाले समुद्री खाद्य उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है।
- भारत का झींगा उत्पादन और निर्यात में अग्रणी स्थान वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत कर रहा है।
- निवेश और तकनीकी नवाचार का विस्तार ग्रामीण आजीविका, समुद्री खाद्य निर्यात और देश की वैश्विक मत्स्य क्षेत्र में भूमिका बढ़ा सकता है।





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