G7 पर्यावरण मंत्रियों ने मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण को वैश्विक सुरक्षा जोखिम मानते हुए भूमि पुनर्स्थापन और सूखा प्रबंधन के लिए वित्तीय समर्थन बढ़ाने पर जोर दिया।
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- जी7 समूह ने पेरिस में आयोजित बैठक (23–24 अप्रैल 2026) में मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे को अपनी पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा।
- मंत्रियों ने इसे “प्रणालीगत वैश्विक चुनौती” और “सुरक्षा जोखिम बढ़ाने वाला कारक” बताया, जिससे यह केवल पर्यावरण नहीं बल्कि भू-राजनीतिक मुद्दा बन गया।
- विश्व की लगभग 40% भूमि क्षरण से प्रभावित है, जिससे करीब 3.2 अरब लोग प्रभावित हो रहे हैं और कृषि, आजीविका तथा आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ रहा है।
- घटते भूमि और जल संसाधनों पर प्रतिस्पर्धा के कारण संघर्ष बढ़ रहे हैं, और पिछले दशकों में 40% से अधिक आंतरिक संघर्ष इन कारणों से जुड़े हैं।
- यासमीन फौद ने कहा कि भूमि क्षरण वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
- G7 देशों ने भूमि पुनर्स्थापन, सतत भूमि प्रबंधन और सूखा प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने के लिए सार्वजनिक और निजी निवेश बढ़ाने का संकल्प लिया।
- सहमति बनाए रखने के लिए जलवायु परिवर्तन को औपचारिक एजेंडा से बाहर रखा गया और ध्यान जैव विविधता, जल प्रबंधन और पर्यावरण वित्त पर केंद्रित रहा।
- यूएनसीसीडी COP17 को वैश्विक स्तर पर भूमि पुनर्स्थापन प्रयासों को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया गया।





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